बेटी की पहचान | सोनिया सुधीर सन्धु

admin admin Editorial Premium
Jul 17, 2020 - 06:03
Updated: 5 years ago
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कोई कहता है बेटी महान
कोई कहता है बेटी अपमान
क्या है, बेटी की पहचान |
दुनिया चली दिलाने मान
मान तो मिलता पर…
खोनी पड़ती असली पहचान |
कभी बेटी, कभी बहन
कभी पत्नी, कभी माँ
कहाँ है उसकी असली पहचान |
जीती जीवन अपना बनकर
दुसरो की पहचान |
चला समाज नेताओं के साथ
चले मनाने बेटी को महान
दिलाने उसको नयी पहचान |
नारे लगाते 'बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओं'
कोई ना जाने उसके सपने
कोई ना जाने उसकी उड़ान
क्या कोई जानता उसकी असली पहचान |
ना बोलो भारत माता की विवाद खड़ा हो जाता हैं
क्या कोई तब माता का असली मतलब समझाता हैं |
ऐसा मिला सम्मान, ऐसी मिली पहचान |

- सोनिया सुधीर सन्धु
काठ कलन, हरियाणा, इंडिया

Comments (5)

User
Deepak Goyat
Deepak Goyat 6 years ago
It's heart touching poem sister
Deepika Sharma
Deepika Sharma 6 years ago
Very nice poem👍.keep it up
Monika
Monika 6 years ago
Bohot hi achi poem h ma'am 🤗👌👌👌
Ashish
Ashish 6 years ago
Great poem
chetna.arya94@gmail.com
chetna.arya94@gmail.com 6 years ago
Beautiful poem.